सागर में एक बूंद: करोड़ों के शोषण के विरुद्ध चोरगड़ी गौशाला की एक 'नन्ही' लेकिन 'साफ़' कोशिश
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सागर में एक बूंद: करोड़ों के शोषण के विरुद्ध चोरगड़ी गौशाला की एक ‘नन्ही’ लेकिन ‘साफ़’ कोशिश

साथियों, जब हम पशुओं का हो रहे शोषण पर नज़र डालते हैं, तो रूह कांप जाती है। भारत में 100 करोड़ से अधिक पशु (गायों, बैलों, भैंसों, मुर्गों, बकरों आदि) का हर दिन किसी न किसी रूप में शोषण हो रहा है। उन्हें मशीनों की तरह निचोड़ा जा रहा है, रसायनों से उनका शरीर खोखला किया जा रहा है और उपयोग खत्म होते ही उन्हें सड़कों पर मरने के लिए फेंक दिया जा रहा है, या कसाईखाने में मांसाहार की पूर्ति के लिए कटने के लिए बेंच दिया जाता है। इस विशाल अंधकार के बीच, हम जानते हैं कि हमारी 300-400 गायों की देख-रेख ‘ऊंट के मुँह में जीरे’ के समान है। 100 करोड़ + के शोषण के सामने 400 की सेवा ‘राई’ के बराबर का काम है। लेकिन सवाल यह नहीं है कि हम कितना कम कर रहे हैं, सवाल यह है कि क्या हम कुछ कर भी रहे हैं? 1. क्षमता की सीमा, संकल्प की अनंतता हम यथार्थवादी (Realistic) हैं। हम जानते हैं कि हम रातों-रात दुनिया के सभी जीवों का दुःख दूर नहीं कर सकते। हमारी क्षमता सीमित है, हमारे संसाधन सीमित हैं। लेकिन हमसे जितना बन पा रहा हम कर रहे हैं। 2. जागरूकता: हमारा असली हथियार हमारा असली उद्देश्य केवल गायों को पालना नहीं, बल्कि इंसान को जगाना है। 3. ज़िम्मेदारी सिर्फ़ हमारी नहीं, आपकी भी है अक्सर लोग गौशालाओं को एक ‘चैरिटी’ की तरह देखते हैं, जहाँ कुछ पैसे देकर वे अपनी जिम्मेदारी से मुक्त हो जाते हैं। लेकिन हम आपसे यह कहना चाहते हैं कि— यह ज़िम्मेदारी आपकी भी उतनी ही है जितनी हमारी। 4. आपकी मदद से बढ़ेंगे कदम आज हमारे पास 400 गौवंश हैं, कल आपकी मदद और समर्थन से यह संख्या 4000 भी हो सकती है। लेकिन उससे भी महत्वपूर्ण यह है कि आपकी मदद से हमारा ‘जागरूकता अभियान’ घर-घर पहुँचेगा। आपका समर्थन हमें वह ताकत देगा कि हम इस ‘राई’ के बराबर काम को एक ‘आंदोलन’ में बदल सकें। सागर बड़ा है और हमारी नाव छोटी, लेकिन हम हाथ पर हाथ रखकर उन्हें डूबते नहीं देख सकते। हम एक छोटी सी मशाल है। इसे बुझने न देना और इसकी लौ को रीवा से लेकर पूरे देश तक फैलाना आपकी भी ज़िम्मेदारी है। आइए, इस साझी धरती पर हर प्राण को बचाने के इस छोटे लेकिन ईमानदार सफर में हमारे साथी बनिए।